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दोस्त की परिभाषा

एक सच्चा और अच्छा दोस्त वही है जो हमारे हर सुख-दुख मे हमारे साथ रहे और जब हम किसी गलत संगती में पड़ जाए या कोई गलत कार्य करे तो वो हमें सही मार्ग पर लाए और उस गलत कार्य को करने से हमे रोके। और जब हम कोई अच्छा कार्य करे तो वह उस कार्य में हमारा सहयोग करे।  एक सच्चा और एक अच्छा मित्र ही हमारी गलतियों को सुधार सकता है।  जबकि एक मतलबी दोस्त जब हम कोई गलत कार्य करे या गलत संगती मे पड़ जाए तो वह हमे सही मार्ग पर लाने की बजाय हमारे उस गलत कार्य मे हमारा सहयोग करेगा। और हमारी गलतियों को सुधारने की बजाय उन गलतियों को बढ़ावा देगा। यही एक अच्छे दोस्त और एक मतलबी दोस्त की पहचान होती है  आज का विचार - मतलबी दोस्तों से दूरी बनाए रखे, अन्यथा परिणाम बुरा हो सकता है ।                      मेनपाल ढुढाँड़ा

दोस्ती

दोस्ती शब्द ऐसा है कि आज की युवा पीढी के इसे अपने भाई से भी बढकर माना जाता है।  आजकल के युवा जब अलग - अलग स्थानो से किसी विद्यालय एंव महाविद्यालय मे मिलते है फिर वे एक दूसरे के मन की भावनाओं को समझ कर इतने गहरे दोस्त बन जाते है कि वे एक दूसरे के लिए कुछ भी कर सकते है। और उन्हें ये दोस्ती जीवन भर याद रहती है।  परन्तु बहुत से व्यक्ति ऐसे होते है जिन्हें मित्रता की परिभाषा नही आती है और ऐसे व्यक्ति मतलब की दोस्ती रखते हैं और अपना मतलब पुरा होने पर उसे लालच मे फसाकर  बर्बाद कर देते हैं  अत: ऐसे दोस्त बनाने चाहिए जो दोस्ती की परिभाषा जानता हो और जो मतलब की दोस्ती न करके दिल से दोस्ती करे। और हर सुख - दुख मे आपका साथ दे।  आज का विचार - अच्छे दोस्त बनाने के लिए स्वयं का अच्छा होना आवश्यक है                                           मेनपाल ढुढाँडा़                         

आत्मविश्वास

किसी भी कार्य को करने के लिए आत्मविश्वास का होना अति आवश्यक है।  यदि हमारे मन मे आत्मविश्वास है, तो हम किसी भी कठिन कार्य को बहुत आसानी से कर सकते हैं।  यदि हम सोचते हैं, कि हमे अपने जीवन में बहुत बड़ा कार्य करना है , तो हमारा उस कार्य के प्रति आत्मविश्वास होना बहुत जरूरी है। तभी हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं।  इसके लिए सर्वप्रथम हमे अपना लक्ष्य तय करना चाहिए, फिर उसके प्रति हमारा आत्मविश्वास होना चाहिए, कि मै इसे कर सकता हूँ।  यदि हमारा लक्ष्य  निर्धारित नही है तो हम अपने जीवन मे कोई बड़ा कार्य नही कर सकते हैं।  आज का विचार - अपने सपनों को पुरा करने के लिए आत्मविश्वास होना बहुत जरूरी है।                                                  मेनपाल ढुढाँडां

आलस्य

आलस्य से मनुष्य की किसी भी कार्य को करने की रुची समाप्त हो जाती है। आजकल प्राणी किसी भी कार्य को करने के लिए स्वयंको बिलकुल भी परेशान नही करना चाहता है । बल्कि उस कार्य को ही सरल करता रहता है, उसका परिणाम चाहे अच्छा हो या बुरा। उसकी प्रवाह  नक्ही करता है । यदि मनुष्य किसी भी कार्य को करने के लिए कठिन परिश्रम  करता है, तो वह अवश्य ही सफलता प्राप्त करता है । लेकिन आलस्य मनुष्य को कठिन परिश्रम करने से रोकता है । यदि मनुष्य आलस्य को त्याग कर रोजाना कठिन परिश्रम करे तो वह अवश्य सफलता प्राप्त कर लेता है ।  आलस्य किसी भी समस्या का हल नही है ,यदि मनुष्य किसी भी कार्य को नही कर पाता है तो भी उसे उस कार्य पर विचार करके कठिन परिश्रम  करना चाहिए , वह उस कार्य को अवश्य ही कर लेगा ।     आज का विचार - आलस्य का त्याग करना चाहिए , तभी अपने जीवन मे कुछ कर सकते है।                                                      ...

मन के भाव

जब हमारा मन खाली होता है , तब हमारे मन मे कई तरह के विचार आते है - जिनमे कुछ विचार अच्छे और कुछ बुरे होते है । हमारा मन जिन विचारो से प्रसन्न होता है उन विचारो के प्रति हमारी ईच्छा उत्पन होती है और अगर मन की ईच्छा बहुत मजबूत हो तो हमारा मन उस ईच्छा को पुरी करने के लिए कुछ भी कर सकता है अर्थात व्यक्ति अपने मन की तीव्र ईच्छा को पुरी करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है चाहे वह इच्छा व्यक्ति को सही मार्ग पर ले जाये या गलत मार्ग पर ले जाये परन्तु मनुष्य उसे पुरा करने की कोई कसर नही छोड़ता है। मनुष्य के मस्तिष्क मे आने वाले विचार -  1) यदि मनुष्य के मस्तिष्क मे कुछ अच्छा विचार आता है ।       जैसे - यदि मनुष्य के मन मे आए कि उसे अपने जीवन मे एक सफल ईन्सान बनना है तो वह एक अच्छा विचार है । जो मनुष्य को 60-70 प्रतिशत तक बदल देता है और अगर वह विचार मजबूत न हो तो वह कुछ समय तक मन मे रहता है। और बाद मे मन से निकल जाता है। और अगर विचार मजबूत हो तो वह एक सफल ईन्सान बन सकता है।    2) यदि मनुष्य के मस्तिष्क मे बुरे विचार आते है। तो वह मनुष्य का पूरी तरह से नाश कर देत...